कृपया एनबीसीसी की शिकायत निपटान नीति को ध्यानपूर्वक पढ़ें, नीचे तक स्क्रॉल करें और आगे बढ़ने के लिए इसे स्वीकार करें।
एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड (एनबीसीसी) के सतर्कता प्रभाग का नेतृत्व मुख्य सतर्कता अधिकारी (सी.वी.ओ.) करते हैं, जिनकी सहायता सतर्कता अधिकारियों (वी.ओ.) द्वारा की जाती है। पूरे भारत और विदेशों में विस्तारित एनबीसीसी के सभी कार्यालयों/इकाइयों/परियोजनाओं के लिए एनबीसीसी का सतर्कता प्रभाग, एनबीसीसी, निगमित कार्यालय, लोधी रोड, नई दिल्ली में स्थित अपने केंद्रीकृत कार्यालय से कार्य करता है।
एनबीसीसी सतर्कता का अधिकार क्षेत्र
- 1. शिकायत केवल एनबीसीसी के कार्मिकों और/या मामलों के खिलाफ दर्ज की जा सकती है।
- 2. एनबीसीसी सतर्कता का निजी व्यक्तियों पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है।
एनबीसीसी सतर्कता, एनबीसीसी के कार्मिकों और/या मामलों से संबंधित मामलों की जांच करती है। एनबीसीसी के अलावा अन्य संगठनों के मुद्दों के संबंध में शिकायत फाइल कर दी जाएगी।
शिकायत दर्ज करना
एनबीसीसी की वेबसाइट www.nbccindia.in के सतर्कता पृष्ठ पर उपलब्ध एनबीसीसी के डाक पते "सी.वी.ओ., एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड, लोधी रोड, नई दिल्ली -110003" पर सीधे लिखित संचार/पत्र भेजकर अथवा एनबीसीसी वेबसाइट के सतर्कता पृष्ठ पर उपलब्ध "शिकायत दर्ज करें" लिंक के माध्यम से, शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
लिखित संचार/पत्र के माध्यम से भेजी गई शिकायत में मामले के विशिष्ट विवरणों/सूचना के साथ प्रेषक का पूरा नाम और डाक पता (मोबाइल/टेलीफोन संख्या, यदि कोई हो, सहित) होना चाहिए। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत पर हस्ताक्षर किए जाने चाहिए। सी.वी.ओ., एनबीसीसी को संबोधित नहीं की गई या सतर्कता विभाग के सतर्कता अधिकारियों की किसी ई-मेल पते पर भेजी गई शिकायत पर विचार नहीं किया जाएगा या उन पर एनबीसीसी सतर्कता द्वारा कोई संज्ञान नहीं लिया जाएगा।
एनबीसीसी सतर्कता में दर्ज शिकायत पर की गई कार्रवाई
- 1) - शिकायत के पंजीकरण और शिकायतकर्ता की सत्यता की पुष्टि (यदि आवश्यक हो) करने के बाद, शिकायत के परिणाम के संबंध में आगे के पत्राचार पर विचार नहीं किया जाएगा। हालांकि, एनबीसीसी सतर्कता यह सुनिश्चित करेगी कि सी.वी.सी. के मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार शिकायत की जांच की गई है/अन्वेषण किया गया है और इसके तार्किक निष्कर्ष पर कार्रवाई की गई है। इसके अलावा, आरोपों का सार उन कार्मिक (कार्मिकों) के साथ साझा किया जाए जिसके/जिनके नाम शिकायत में प्रदर्शित होते हैं या जिनकी भूमिका शिकायत की जांच के दौरान सामने आती है।
- 2) - निविदाओं के खिलाफ शिकायत के संबंध में, यह स्पष्ट किया जाता है कि एनबीसीसी सतर्कता, मामले की जांच करेगी, हालांकि यह निविदा प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करेगी। इसका उद्देश्य संगठन में कार्य रोकने का नहीं है।
- 3) - जैसा कि एनबीसीसी सतर्कता केवल भ्रष्टाचार के मामलों को देखती है, शिकायतों का निवारण के लिए एनबीसीसी सतर्कता, शिकायत का केंद्र नहीं होना चाहिए।
- 4) - शिकायतों में तथ्यात्मक विवरण, सत्यापन योग्य तथ्य और संबंधित मामले शामिल होने चाहिए। वे अस्पष्ट या उनमें व्यापक सामान्य आरोप शामिल नहीं होने चाहिए। ऐसी शिकायत जो अस्पष्ट है और जिसमें व्यापक/प्रमाणन रहित आरोप शामिल हैं, फाइल की जाएगी।
- 5) - प्राप्त शिकायत को पहले शिकायतकर्ता को स्वीकृत/अस्वीकृत, जैसा भी मामला हो, करने के लिए भेजा जाएगा। शिकायतकर्ता को उत्तर के साथ अपने पहचान प्रमाण की एक प्रति प्रदान करना आवश्यक है। यदि शिकायत भेजने के 15 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता की ओर से कोई जवाब नहीं मिलता है, तो एक अनुस्मारक भेजा जाएगा। अनुस्मारक भेजने के बाद 15 दिनों तक प्रतीक्षा करने के बाद भी अगर कोई जवाब नहीं आता है, तो उक्त शिकायत एनबीसीसी सतर्कता (सी.वी.ओ.) द्वारा छद्म नाम से दर्ज किया जा सकता है।
- 6) - शिकायत, सीधे एनबीसीसी सतर्कता (सी.वी.ओ.) को संबोधित की जानी चाहिए। एनबीसीसी सतर्कता (सी.वी.ओ.) को प्रति के रूप में चिह्नित की गई शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
- 7) - शिकायत पर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए अंग्रेजी या हिंदी भाषा में टंकित या लिखित रूप में शिकायत दर्ज की जानी चाहिए। हिंदी या अंग्रेजी में प्राप्त न होने वाली शिकायतों का पहले हिंदी या अंग्रेजी में अनुवाद किया जाएगा और उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- 8) - सभी प्रकार की शिकायतें, भले ही मुद्रित या फोटोकॉपी की गई हों, स्पष्ट रूप से पठनीय होनी चाहिए। अपठनीय शिकायतें फाइल कर दी जाएंगी।
- 9) - एनबीसीसी सतर्कता, गुमनाम/ छद्म नाम की शिकायत पर विचार नहीं करती है।
- 10) - शिकायतकर्ता को केवल सतर्कता संबंधित मुद्दों के बारे में शिकायतें दर्ज करनी चाहिए और वे किसी भी अदालतों, न्यायाधिकरणों आदि में किसी मुकदमेबाजी का हिस्सा न हों अर्थात मामला न्यायाधीन नहीं होना चाहिए। ज्ञात न्यायाधीन मामलों की शिकायतों को फाइल किया जाता है।
- 11) - सामान्यतः एक शिकायत में एक विशिष्ट मुद्दा उठाया जाना चाहिए। हालांकि, यदि एक से अधिक विशिष्ट मुद्दे हैं, तो उन्हें अलग शिकायत में उल्लिखित करना बेहतर होगा। इसके अलावा, एनबीसीसी को अपनी शिकायतें अग्रेषित करते समय शिकायतकर्ता, सतर्कता को सुसंगत तरीके से एक-एक करके विवरणों का उल्लेख करना चाहिए ताकि इसे स्पष्ट रूप से समझा जा सके।
- 12) - प्रशासनिक मुद्दों या तकनीकी खामियों वाली शिकायत को आवश्यक कार्रवाई के लिए गैर-सतर्कता शिकायतों के रूप में संबंधित नामोद्दिष्ट प्राधिकारी को, जैसा लागू हो, अग्रेषित की जाएगी।
- 13) - सत्यनिष्ठा समझौता (आई.पी.) के अंतर्गत आने वाली शिकायतों को आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए स्वतंत्र बाह्य अनुवीक्षकों (आई.ई.एम.) को भेजा जाएगा।
- 14) - सी.वी.सी. से प्राप्त "जनहित प्रकटीकरण के तहत शिकायत" या "पी.आई.डी.पी.आई." की जांच/निपटान, सी.वी.सी. के अनुदेश के अनुसार किया जाता है।
- 15) - भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 182 के तहत, झूठी शिकायत करने वाले व्यक्ति पर मुकदमा चलाया जा सकता है।
- 16) - झूठी शिकायत करने वाला व्यक्ति यदि सरकारी कर्मचारी है तो उसके खिलाफ अभियोजन के विकल्प के रूप में विभागीय कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है।
- 17) - आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 195(1)(क) के तहत, झूठी शिकायत करने वाले व्यक्ति पर उस लोक सेवक द्वारा जिसके पास झूठी शिकायत की गई थी या किसी अन्य लोक सेवक द्वारा जिसके वह अधीनस्थ है, सक्षम न्यायालय में दर्ज शिकायत के आधार पर मुकदमा चलाया जा सकता है।