परियोजना प्रबंधन परामर्श
पीएमसी सेवाएं, जो कंपनी के कुल राजस्व का 93% हिस्सा हैं, में मुख्य रूप से इंजीनियरी परियोजनाओं के क्रियान्वयन की देखरेख, उनकी संकल्पना से लेकर अंतिम कमीशनिंग तक शामिल है, जिससे सेवार्थियों के कार्यक्षेत्र के साथ समग्र अनुपालन सुनिश्चित होता है।
पीएमसी सेवाएं प्रदान करने में हमारा ज्ञान और अनुभव हमारे सेवार्थियों की संतुष्टि और विभिन्न क्षेत्रों जैसे रिहायशी/आवास, जीपीआरए कॉलोनियों का पुनर्विकास, स्वास्थ्य, शैक्षिक/संस्थागत, विरासत, सामाजिक और सांस्कृतिक में सिविल निर्माण परियोजनाओं की श्रृंखला हेतु हमारी विविध प्रबंधन एवं परामर्श सेवाओं के माध्यम से व्यापक रूप से स्वीकार किया गया है।
पर्यावरण, अर्धसैनिक बलों, रक्षा कार्मिकों के अवसंचनात्मक कार्य, सीमा बाड़ लगाने के कार्य के साथ-साथ अन्य अवसंचनात्मक परियोजनाएं जैसे सड़क, जल आपूर्ति, वर्षा जल निकासी प्रणाली, सीवेज उपचार संयंत्र/जल उपचार संयंत्र, घरेलू और विदेशी मंच पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन योजनाएं, सरकारी/पीएसयू भूमि का मुद्रीकरण।
हम '2022 तक सबके लिए आवास', प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई), किफायती किराया आवास योजना (एएचआरसी), 'स्मार्ट सिटीज मिशन', 'नमामि गंगे', प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई), आयुष्मान भारत, रक्षा भूमि आदि जैसी प्रमुख योजनाओं में मुख्य भागीदार हैं।
इसके अतिरिक्त, यह हमारी बढ़ती प्रतिष्ठा का प्रमाण है कि हमारी पीएमसी सेवाएं, यदि हमारे सेवार्थी चाहें तो एनबीसीसी सर्विसेज लिमिटेड (एनएसएल), जो एनबीसीसी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है, के माध्यम से अनुरक्षण सेवाएं भी प्रदान करती हैं जिसकी संकल्पना मुख्य रूप से हमारे सेवार्थियों को विशिष्ट अनुरक्षण सेवाएं प्रदान करने के लिए की गई है।
अपनी गतिविधियों के विस्तार में, कंपनी सरकार के लिए संपत्तियों के पुनर्विकास का कार्य भी करती है। हमारी पीएमसी सेवाएं सेवार्थियों की संतुष्टि सुनिश्चित करने के हमारे निरंतर प्रयास में लागत, गुणवत्ता और समय के मूल दिशानिर्देशों के आधार पर प्रतिस्पर्धात्मकता सुनिश्चित करने पर केंद्रित हैं।
पुनर्विकास परियोजनाएं
एनबीसीसी की भूमि संपत्तियों के पुनर्विकास एवं मुद्रीकरण में विशेष भूमिका है। एनबीसीसी भूखंड की बिक्री और मौजूदा भूमि के पुनर्विकास के माध्यम से भूखंड के विपणन एवं मुद्रीकरण हेतु सिंगल विंडो सेवाएं प्रदान करेगा। इन परियोजनाओं में राजकोष से कोई धनराशि नहीं ली गई है, इसके विपरीत क्षेत्र को अत्याधुनिक संपत्ति में विकसित करने के बाद अधिशेष राशि सरकार को जमा की गई है।
प्रमुख विशेषताएं
यह अद्वितीय स्व-संधारणीय मॉडल पर काम करता है जिसमें वाणिज्यिक कार्य के माध्यम से निधि सृजित की जाती है।पुनर्विकास परियोजनाएं फिक्सड पीएमसी + विपणन शुल्क पर कार्य करती हैं और एनबीसीसी अवधारणा से लेकर कमीशनिंग तक सेवार्थी के लिए पीएमसी एजेंसी है।
उक्त परियोजना तीन मॉडलों जैसे मॉडल 1, मॉडल 2 और मॉडल 3 पर कार्य करती है।
- मॉडल 1- भूमि के भाग की एकमुश्त बिक्री
- मॉडल 2- भाग का दीर्घकालिक पट्टा
- मॉडल 3- भाग की पूर्ण स्वामित्व बिक्री
महत्वपूर्ण परियोजनाएं
- जीपीआरए न्यू मोती बाग दिल्ली (परियोजना लागत 524 करोड़) - मॉडल 1 पर आधारित
- जीपीआरए ईस्ट किदवई नगर दिल्ली (परियोजना लागत 5500 करोड़ लगभग) - मॉडल 2 पर आधारित
चालू परियोजनाएं
- दिल्ली में तीन कॉलोनियों (परियोजना लागत लगभग 24000 करोड़) - सरोजिनी नगर, नेताजी नगर और नौरोजी नगर का पुनर्विकास - मॉडल 3 पर आधारित
- आयुर्विज्ञान नगर और पश्चिम अंसारी नगर में एम्स रिहायशी कॉलोनियां (परियोजना लागत लगभग 5000 करोड़) - मॉडल 2 पर आधारित