सतर्कता के बारे में
एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड में सतर्कता कार्यकलाप, प्रबंधन का अभिन्न अंग है। यह एनबीसीसी के सभी सतर्कता संबंधी मामलों की देखरेख करने के लिए नोडल अनुभाग है। इसका विश्वास है कि लागू श्रेष्ठ कार्यपद्धतियां, पर्याप्त नियंत्रण और पारदर्शिता से लिए गए निर्णय व्यावसायिक, सक्षम, प्रभावी तथा एकरूप होते हैं जो निगमित उत्कृष्टता की ओर अग्रसर करते हैं। मुख्य सतर्कता अधिकारी (संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी) निगम के सतर्कता प्रभाग के प्रमुख हैं।
निगम के भीतर, जन सदस्यों, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो, केंद्रीय सतर्कता आयोग, सेवार्थियों तथा शहरी विकास मंत्रालय से प्राप्त शिकायतों की जाँच सतर्कता प्रभाग में की जाती है। शिकायतों की जाँच करने के बाद जहाँ चूक/अनियमितताएं सिद्ध हो जाती हैं वहाँ दोषी कर्मचारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई आरंभ की जाती है। इसके अतिरिक्त निगम में भ्रष्टाचार को दूर करने के अंतिम उद्देश्य के साथ निम्नलिखित चार सूत्रीय रणनीतियाँ अपनाई गई हैं जिसे भ्रष्टाचार निरोधक उपायों के रूप में वार्षिक कार्य योजना में शामिल किया गया है:
- निवारक सतर्कता।
- खोजी सतर्कता तथा निगरानी।
- दंडात्मक सतर्कता।
- कदाचार पर अंकुश लगाने के लिए और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (आई.टी.) नव प्रवर्तनों का उपयोग।
निवारक सतर्कता:
सतर्कता प्रभाग द्वारा स्वतंत्र रूप से अथवा अन्य क्षेत्र के पदाधिकारियों/एजेंसियों जैसे वित्तीय लेखापरीक्षा तथा साथ ही मुख्य तकनीकी परीक्षक – सी.वी.सी. (सी.टी.ई.) के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर समय-समय पर संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण किया जाता है। निरीक्षण/अन्वेषण के दौरान पाई गई सामान्य अनियमितताओं के आधार पर निगम के कर्मचारियों में जागरूकता पैदा करने के लिए परिपत्र तथा प्रणाली सुधार के लिए निदेश जारी किए जाते हैं। सतर्कता प्रभाग द्वारा संदेहास्पद सत्यनिष्ठा वाले अधिकारियों की सूची तैयार की जाती है तथा संवेदनशील पदों पर तैनात अधिकारियों के स्थानांतरण सुनिश्चित किए जाते हैं।
निवारक सर्तकता पहलों के भाग के रूप में सर्तकता विभाग के अधिकारियों को बाह्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नियमित रूप से नामित किया जाता है। त्यागपत्र, पदोन्नति, पासपोर्ट के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र, वैयक्तिक यात्रा/प्रशिक्षण इत्यादि के लिए विदेश जाने के संबंध में सर्तकता अनापत्ति के मामलों को निरंतर आधार पर जांचा जाता है। कार्मिकों के वार्षिक संपत्ति विवरणी की निरंतर आधार पर समीक्षा की जाती है।
खोजी सतर्कता:
जन सदस्यों के प्रतिनिधियों, लेखापरीक्षा रिपोर्टों, निरीक्षणों से प्राप्त शिकायतों के आधार पर अवमानक कार्य तथा अनैतिक कार्यपद्धतियों की गहराई से जांच की जाती है तथा इन अनियमितताओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए कदम उठाए जाते है।
दंडात्मक सतर्कता:
केंद्रीय सतर्कता आयोग के मुख्य तकनीकी परीक्षक एवं/अथवा सतर्कता प्रभाग द्वारा अन्वेषण के उपरान्त प्राप्त रिपोर्टों के आधार पर जहॉ कहीं कदाचार अथवा भ्रष्ट आचरण पाया जाता है वहाँ उन दोषी कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई आरंभ की जाती है तथा तदनुसार उन्हें दंडित किया जाता है।
आई.टी. अनुप्रयोग और ई-गवर्नेंस को बढ़ाना:
पारदर्शिता एवं प्रभावी सतर्कता प्रशासन को सुनिश्चित करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी नवप्रवर्तनों का सक्रियता से उपयोग किया जा रहा है । इस दिशा में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम निम्नलिखित हैं :
- सरकारी पोर्टल (जी.ई.एम. पोर्टल) के माध्यम से ऑनलाइन अधिप्राप्ति।
- ऑनलाइन कार्य-निष्पादन प्रबंधन प्रणाली का कार्यान्वयन।
- बिलों के तीव्र और प्रभावी समाशोधन के लिए ई-बिलिंग प्रणाली का कार्यान्वयन।
- संविदाकारों / विक्रेताओं की शिकायतों के निवारण के लिए ऑनलाइन शिकायत पोर्टल का कार्यान्वयन।
- फाइलों और दस्तावेजों के पारदर्शी संचलन के लिए एन.आई.सी. ई-ऑफिस का कार्यान्वयन।
- ई-मेल संचार के लिए एन.आई.सी. ई-मेल सेवा।
- भौतिक (प्रत्यक्ष) रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण के लिए दस्तावेज़ प्रबंधन प्रणाली का कार्यान्वयन।
- अधिवर्षिता प्राप्त कार्मिकों की परिपत्र देखने, चिकित्सा सेवाओं की जांच करने, प्रपत्र 16, अंतिम आहरित वेतन, पेंशन और ई.पी.एफ. विवरण, नामिकायन अस्पताल की सूची आदि जैसी जरूरतों को पूरा करने के लिए सुपर एनुलेटेड कार्मिक पोर्टल।
- एनबीसीसी द्वारा घोषित पदों के लिए आवेदन पत्र भरने हेतु ऑनलाइन भर्ती पोर्टल।
किए गए सिस्टम सुधार:
- बंद पड़ी परियोजनाओं के पुराने भुगतानों को जारी करने की जांच करने हेतु तंत्र।
- फील्ड टीमों में तैनात अधिकारियों के कर्तव्य एवं उत्तरदायित्व।
- चरण भुगतान अनुसूची तैयार करने और ई.पी.सी. संविदाओं में मापन की रिकॉर्डिंग के लिए एस.ओ.पी. और दिशानिर्देश।
- ओ.टी.पी. एवं प्रमाणपत्र के साथ संविदाकारों के बिलों को पास/अनुमोदन करना।
- अनुमोदित मेक सूची में उस विनिर्माता के नाम को शामिल करना जिसके पास संविदा/डी.एल.पी./वारंटी अवधि के अंत तक उनका विनिर्माण लाइसेंस है।
- कई ब्रांडों/मेकों को योग्य बनाने के लिए इस तरह से "अनुमोदित मेकों को सूचीबद्ध करना" जो वांछित गुणवत्ता/प्रदर्शन की पुष्टि करते हैं और इन पर एकाधिकार नहीं होना चाहिए।
- कार्य दिए जाने के पूर्व, एल-1 बोलीदाता की प्रामाणिकता का सत्यापन।